दिल्ली का 'सत्य निकेतन हादसा'

छात्रों की रोज़मर्रा ज़िंदगी की सच्चाई!

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का 'सत्य निकेतन'

इस तरह धराशायी हुई इमारत (AI Visual)

सत्य निकेतन में क्या हुआ?

6 सितंबर, 2026: दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पांच मंज़िला इमारत ढह गई. 1990 के दशक में बनी इस बिल्डिंग में छात्रों के लिए प्राइवेट हॉस्टल था. 27 घंटों तक सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया.

नुक़सान: 7 लोगों की मौत, कई घायल.

हादसे वाला इलाक़ा: सत्य निकेतन, दक्षिण दिल्ली में घनी आबादी वाली एक पुनर्वास कॉलोनी है. यहां आमतौर पर प्लॉट छोटे होते हैं, जिनका आकार क़रीब 55 वर्ग गज होता है. प्रॉपर्टीज़ का इस्तेमाल छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन (PG) के तौर पर किया जाता है. इलाक़े में बिल्डिंग से जुड़े काम MCD के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.

जांच में क्या पता चला?

MCD अधिकारियों के मुताबिक़, हादसे के वक़्त कोई नया निर्माण कार्य नहीं हो रहा था. हालांकि, मकान मालिक ने हाल ही में कुछ मरम्मत और नवीनीकरण का काम करवाया था.

इमारत के गिरने के पीछे की असली वजह अभी तक नामालूम है. अधिकारियों का अनुमान है कि पिछले दिनों हुई भारी बारिश से पुरानी इमारत कमज़ोर हो गई होगी.

छात्रों की आपबीती

जान्हवी राणा, छात्रा

"हमें रात भर अपनी PG के बेड पर नींद नहीं आई. यह रात (हादसे के बाद) हमारे लिए सबसे मुश्किल थी. हमारे दिल तक डर बैठ चुका है. "

हर्ष यादव, BSc छात्र, ARSD

"मैंने अपने दोस्त को खो दिया. PG के नाम पर धंधा चल रहा है. मैं हर ₹15 हज़ार देकर PG में रहता हूं, डर भी लगता है. अगर कॉलेज का अपना हॉस्टल होता, तो मुश्किल से महीने के 5-6 हजार लगते."

यशवर्धन, छात्र

“कॉलेज में हॉस्टल बनाना सिर्फ़ स्टूडेंट पॉलिटिक्स का मुद्दा बनकर रह गया है. हर स्टूडेंट यूनियन आकर बोलता है कि हॉस्टल बनेगा. सत्य निकेतन तो कुछ नहीं, वसंत गांव की हालत बदतर है.”

हर्षवर्धन, छात्र, ARSD

“कॉलेज में हॉस्टल नहीं होने की वजह से छात्रों को मजबूरी में PG में रहना पड़ता है. पूरे दिल्ली यूनिवर्सिटी 7 लाख से ज़्यादा बच्चों की सीटें हैं लेकिन हॉस्टल सिर्फ 5 हजार को मिलता है.”

इशिका, छात्रा, जीसस & मैरी कॉलेज

"अगर हमारे कॉलेज में हॉस्टल होते तो हमें यहां आने की ज़रूरत ही नहीं होती. हमें (सत्य निकेतन में) इन परिस्थितियों में रहना पड़ रहा है. हमारे लिए भी तो अपनी सुरक्षा जरूरी है.”

हॉस्पिटल से लौटे छात्र की दास्तान

"हम लोग सुबह खाना खाकर रूम में बैठे ही थे कि पूरी बिल्डिंग ढह गई. हम उसके नीचे एक-डेढ़ घंटे तक दबे रह गए. एक-डेढ़ घंटे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ."

डीयू में हॉस्टल टेढ़ी खीर क्यों?

लापरवाह दिल्ली? 2026 में ही कई हादसे

सत्य निकेतन में गिरी पांच मंज़िला इमारत इस साल दिल्ली में गिरी पांचवीं इमारत है. इस घटना में सात लोगों की मौत के साथ ही, ऐसी घटनाओं में जान गंवाने वालों की कुल तादाद 16 हो गई है. सरकारी आंकड़ों और पुलिस के बयानों के मुताबिक, ये 16 मौतें तीन घटनाओं में हुईं.

मई 2026, साकेत, दिल्ली

साउथ दिल्ली में साकेत मेट्रो स्टेशन के पास कोचिंग सेंटर, कैफे और ऑफिस वाली एक कमर्शियल बिल्डिंग के ढहने से 6 लोगों की मौत हुई. आठ अन्य घायल हुए थे.

जुलाई 2026, रोहिणी, दिल्ली

नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली के रोहिणी में जुलाई में बन रही चार मंज़िला इमारत ढहने से तीन लोगों की मौत हुई. भारी बारिश के बीच इमारत गिरने से हादसा हुआ था.

सितंबर 2026, सत्य निकेतन

सत्य निकेतन में गिरी पांच मंज़िला इमारत ढहने से हुए हादसे के बाद, अब तक सात लोगों के मारे जाने की ख़बर मिली है.

राष्ट्रीय स्तर पर क्या हालात?

क्रेडिट्स

डेवलपर: मोहम्मद साक़िब मज़ीद
तस्वीरें: पीटीआई, आईएएनएस
एआई विजुअल्स: NDTV ग्राफिक्स टीम